SANDESH QALAM

क़लम के साथ समझौता नहीं , मुझे लिखना है

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Thursday, 15 March 2018

गुरुर किस का रहा है गुरुर टूटेगा

                                           


चलो न आज सही कल ज़रूर टूटेगा 
 गुरुर किस का रहा है गुरुर टूटेगा   


आज मुझे अपने एक कवि /शायर दोस्त (नदीम शाद ) की ग़ज़ल की यह पंक्ति याद आरही है जो बिहार एवं उत्तर प्रदेश के उपचुनाव के परिणाम के संदर्भ में सटीक है . कल के उपचुनाव के नतीजों ने बीजेपी की गुरुर को ख़ाक में मिलाने का काम किया है और बीजेपी की आत्मविश्वास को भी चकनाचूर करदिया है .बिहार में किसी तरह बीजेपी ने अपनी साख बचाने में सफलता पाई ,वही उस के सहयोगी दल जनता दल युनाइटेड का पूरा घमंड राजद ने तोड़ डाला है .बिहार के भभुआ सीट से बीजेपी उम्मीदवार विजयी हुयी हैं .अररिया एवं जहानाबाद सीट को राजद ने अपने कब्जे में लेकर एक एतेहासिक जीत दर्ज की है और बिहार की समस्त जनता  राजद की इस एतेहासिक जीत के लिए राजद की ज़िम्मेदारी को अपने कन्धे पर उठाने वाले तेजस्वी यादव को श्रेह् दे रहे हैं , राजनेतिक विशेसज्ञों का कहना है की आगामी चुनाव में राजद सब से बड़े दल के रूप में अपने आप को पेश करेगा और एनडीए के लिए ख़ासा मुश्किलें खड़ी करसकता है .
उत्तरप्रदेश की बात की जाये तो समाजवादी पार्टी (सपा ) ने भाजपा को गोरखपुर ,फूलपुर दोनों सीटों से हराकर अभी हाल ही में पुर्वउत्तर तीनो राज्यों में सरकार के गठन का सारा जश्न और जोश को ठंडा कर दिया है सपा के मुखिया अखिलेश यादव का दबदबा राज्य के मुखिया श्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ में भी कायम रहा यह योगी जी के लिए शुभ संकेत नहीं है . राजनीतिज्ञ बताते हैं की राज्य के दोनों सीटों पे बीजेपी की हार का कारण योगी हैं , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संवादाताओं से कहा की हम अपनी इस हार की समीक्षा करेंगे कही न कहीं से चुक हुई है जिस पर विचार किया जायेगा , वही श्री योगी ने सपा और बी एस पी के बीच आपसी सौदेबाज़ी का आरोप भी लगाया , सुश्री मायावती ने अपने साथ कई दलों को मिलकर चुनाव लड़ा इस का फायदा सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को पहुंचा और बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा .







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